Jinnah Picture In Amu, Hindu Organisation Member Fought With Amu
Students - Amu में जिन्ना की तस्वीर का विवाद और भड़का, हिंदूवादी संगठन और छात्र
आपस में भिड़े
Anand sharmaMay 02, 20180
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगी होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब एएमयू सर्किल पर हिंदू युवा वाहिनी के लोगों ने जिन्ना का पुतला फूंका है। जिसके बाद हिंदूवादी संगठन और एएमयू के छात्र आपस में भिड़ गए। वहीं हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाते हुए एएमयू कैंपस में घुसने की कोशिश की। पूरे मामले को शांत कराने में पुलिस को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक हिंदू संगठन के लोग और छात्र लठ लेकर आमने सामने आ गए थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं को सिविल लाइन थाने भेज दिया है। वहीं शहर के एसपी का कहना है कि वहां कोई लाठी नहीं चली। जबकि छात्र खुद पर हमले का आरोप लगाते हुए हंगामा कर रहे हैं। उनका कहना है कि हिंदू वाहिनी के लोगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।
गैरतलब है कि एएमयू में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने पर सांसद सतीश कुमार गौतम भड़क गए थे। उन्होंने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र भेजकर यह तस्वीर लगाने का औचित्य पूछा था। दूसरी ओर एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय का कहना है कि यह तस्वीर छात्रसंघ भवन में लगी है। एएमयू प्रशासन छात्रसंघ के कार्यों में दखल नहीं देता।
सांसद सतीश कुमार गौतम ने कहा कि उन्हें एएमयू में जिन्ना की तस्वीर लगी होने की जानकारी मिली है। यह तस्वीर कहां और किस वजह से लगी है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कुलपति को पत्र भेजकर उनसे जिन्ना की तस्वीर लगाने की वजह पूछी है। आखिर एएमयू की कौन सी मजबूरी है कि उसे जिन्ना की तस्वीर लगानी पड़ रही है। पूरी दुनिया जानती है कि जिन्ना भारत के बंटवारे के मुख्य सूत्रधार थे। मौजूदा हालात में पाकिस्तान रोजाना बेजा हरकतें करने से बाज नहीं आ रहा है। सांसद प्रवक्ता संदीप चाणक्य ने बताया कि कुलपति को पत्र भेजा जा चुका है।
उधर, एएमयू जनसंपर्क कार्यालय के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि दूसरी ओर द अली जिन्ना की तस्वीर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ भवन में लगी है। दरअसल, यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी, तब छात्रसंघ का गठन हो चुका था।
भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले वर्ष 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना एएमयू में आए थे, उन्हें छात्रसंघ ने मानद सदस्यता दी थी। छात्रसंघ ने जिन लोगों को मानद सदस्यता दी है, उनकी तस्वीरें छात्रसंघ भवन में लगवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ एक स्वतंत्र संगठन है, इसलिए एएमयू इंतजामिया इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करता है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगी होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब एएमयू सर्किल पर हिंदू युवा वाहिनी के लोगों ने जिन्ना का पुतला फूंका है। जिसके बाद हिंदूवादी संगठन और एएमयू के छात्र आपस में भिड़ गए। वहीं हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाते हुए एएमयू कैंपस में घुसने की कोशिश की। पूरे मामले को शांत कराने में पुलिस को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक हिंदू संगठन के लोग और छात्र लठ लेकर आमने सामने आ गए थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं को सिविल लाइन थाने भेज दिया है। वहीं शहर के एसपी का कहना है कि वहां कोई लाठी नहीं चली। जबकि छात्र खुद पर हमले का आरोप लगाते हुए हंगामा कर रहे हैं। उनका कहना है कि हिंदू वाहिनी के लोगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।
गैरतलब है कि एएमयू में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने पर सांसद सतीश कुमार गौतम भड़क गए थे। उन्होंने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र भेजकर यह तस्वीर लगाने का औचित्य पूछा था। दूसरी ओर एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय का कहना है कि यह तस्वीर छात्रसंघ भवन में लगी है। एएमयू प्रशासन छात्रसंघ के कार्यों में दखल नहीं देता।
एएमयू जनसंपर्क कार्यालय ने दिया था ये जवाब
सांसद सतीश कुमार गौतम ने कहा कि उन्हें एएमयू में जिन्ना की तस्वीर लगी होने की जानकारी मिली है। यह तस्वीर कहां और किस वजह से लगी है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कुलपति को पत्र भेजकर उनसे जिन्ना की तस्वीर लगाने की वजह पूछी है। आखिर एएमयू की कौन सी मजबूरी है कि उसे जिन्ना की तस्वीर लगानी पड़ रही है। पूरी दुनिया जानती है कि जिन्ना भारत के बंटवारे के मुख्य सूत्रधार थे। मौजूदा हालात में पाकिस्तान रोजाना बेजा हरकतें करने से बाज नहीं आ रहा है। सांसद प्रवक्ता संदीप चाणक्य ने बताया कि कुलपति को पत्र भेजा जा चुका है।
उधर, एएमयू जनसंपर्क कार्यालय के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि दूसरी ओर द अली जिन्ना की तस्वीर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ भवन में लगी है। दरअसल, यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी, तब छात्रसंघ का गठन हो चुका था।
भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले वर्ष 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना एएमयू में आए थे, उन्हें छात्रसंघ ने मानद सदस्यता दी थी। छात्रसंघ ने जिन लोगों को मानद सदस्यता दी है, उनकी तस्वीरें छात्रसंघ भवन में लगवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ एक स्वतंत्र संगठन है, इसलिए एएमयू इंतजामिया इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करता है।